दर्द भरी आंखो मे खिली ख़ुशी तुम क्या जानो
दर्द भरे दिल को अपने पन का अहेसास तुम क्या जानो
तपती धर्तीपर बारीश कि बौछारे तुम क्या जानो
भुकी पेट मे दो दाने अनाज को तुम क्या जानो
एक दरखाज मेरी भी आज सून लो
दबे मोहब्बत के रूसवाई को तुम क्या जानो
मोहबत किसीके मिल्कीयात हो नही
हर माज्ज्धार पे किये सजदे को तुम क्या जानो
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